Their Words, Their Voice

Ghazals, Nazms....

Sunday, July 24, 2005

एक बस तू ही नहीं मुझसे ख़फ़ा हो बैठा

Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Mehdi Hasan

एक बस तू ही नहीं मुझसे ख़फ़ा हो बैठा
मैंने जो संग तराशा वो ख़ुदा हो बैठा।

उठ के मंज़िल ही अगर आए तो शायद कुछ हो
शौक-ए-मंज़िल तो मेरा आबलपा हो बैठा।

शुक्रिया ऐ मेरे क़ातिल ऐ मसीहा मेरे
ज़हर जो तूने दिया था वो दवा हो बैठा।

--

Could not find the meaning of आबलपा. Any help?

--

संग = Stone

Categories:

0 Comments:

Post a Comment

<< Home