Their Words, Their Voice

Ghazals, Nazms....

Friday, July 01, 2005

ये बातें झूठी बातें हैं

Lyricist: Ibn-E-Insha
Singer: Ghulam Ali

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं।
तुम इन्शा जी का नाम न लो, क्या इन्शा जी सौदाई हैं?

हैं लाखों रोग ज़माने में क्यों इश्क है रुसवा बेचारा
हैं और भी वज़हें वहशत की इन्शा को रखतीं दुखियारा।
हाँ, बेकल-बेकल रहता है, हो पीत में जिसमें जी हारा
पर शाम से लेकर सुबहो तलक यूँ कौन फिरे है आवारा।

गर इश्क किया है तब क्या है, क्यों शाद नहीं आबाद नहीं
जो जान लिए बिन टल ना सके ये ऐसी भी उफ़ताद नहीं।
ये बात तो तुम भी मानोगे वो कैस नहीं फ़रहाद नहीं
क्या हिज्र का दारू मुश्किल है, क्या वस्ल के नुस्खे याद नहीं।

जो हमसे कहो हम करते हैं, क्या इन्शा को समझाना है।
उस लड़की से भी कह लेंगे गो अब कुछ और ज़माना है।
या छोड़ें या तक़मील करें ये इश्क है या अफ़साना है।
ये कैसा गोरखधंधा है, ये कैसा तानाबाना है।


--
रुसवा = Disgraced
वहशत = Solitude, Grief, Fear
पीत = Love, Affection
शाद = Cheerful, Happy
उफ़ताद = Calamity
हिज्र = Separation
दारू = Medicine, Remedy
वस्ल = Communion
गो = Although, Though
तक़मील = Getting over with, Taking to a conclusion

Categories:

3 Comments:

At 2/7/05 12:52 PM, Blogger vikash said...

I saw you on orkut(The bihari). When browsing through ur homepage, I came on ur blog. And in ur blog I found this amitious project..:). well...! Meri mehnat bekaar nahi gayi...I found here something very appreciable.
I've bookmarked this page.

thanx 4 such a wonderful collection.

 
At 2/7/05 5:09 PM, Blogger Jaya said...

Thanks a lot for this and all the other comments on "Miles to Go".

Hope you will continue enjoying the additions to the collection.

 
At 5/7/05 3:38 PM, Blogger Sandeep said...

This song has become my favourite one these days after I luckily got to listen to this (because raaga.com has mislinked this song with some other popular song). However, my dictionary of urdu words is almost empty.
Thanks for providing the translation of keywords.

 

Post a Comment

<< Home