Their Words, Their Voice

Ghazals, Nazms....

Sunday, June 26, 2005

ज़ुल्फ़ बिखरा के निकले वो घर से

Lyricist: Bekal Utsahi
Singer: Hussain Brothers

ज़ुल्फ़ बिखरा के निकले वो घर से
देखो बादल कहाँ आज बरसे।

फिर हुईं धड़कनें तेज़ दिल की
फिर वो गुज़रे हैं शायद इधर से।

मैं हर एक हाल में आपका हूँ
आप देखें मुझे जिस नज़र से।

ज़िन्दग़ी वो सम्भल ना सकेगी
गिर गई जो तुम्हारी नज़र से।

बिजलियों की तवाजों में 'बेकल'
आशियाना बनाओ शहर से।

--

तवाजों = Hospitality

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4 Comments:

At 26/6/05 10:11 PM, Anonymous Anonymous said...

the biljion ki tawajon is correct

 
At 26/6/05 10:17 PM, Blogger Jaya said...

And what does it mean?

 
At 28/6/05 9:08 PM, Blogger abhaya said...

It is biijliyon ki tawajon se "bekal". I also don't know the meaning though.

 
At 29/6/05 1:22 PM, Blogger Jaya said...

Ah! It makes sense now. It's bijliyon ki twajon mein Bekal and Bekal is the name of the poet :-)

 

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