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Ghazals, Nazms....

Saturday, June 25, 2005

ये किसने कह दिया आख़िर कि छिप-छिपा के पिओ

Lyricist: Sant Darshan Singht
Singer: Ghulam Ali

ये किसने कह दिया आख़िर कि छिप-छिपा के पिओ
ये मय है मय, इसे औरों को भी पिला के पिओ।

ग़म-ए-जहाँ को ग़म-ए-ज़ीस्त को भुला के पिओ
हसीन गीत मोहब्बत के गुनगुना के पिओ।

ग़म-ए-हयात का दरमाँ हैं इश्क के आँसू
अँधेरी रात है यारों दिए जला के पियो।

नसीब होगी बारह कैफ़ मर्ज़ी-ए-साकी
मिले जो ज़हर भी यारों तो मुसकुरा के पिओ।

मेरे ख़ुलूस पे शैख़-ए-हरम भी कह उठा
जो पी रहे हो तो 'दर्शन' हरम में आ के पिओ।

--
मय =Wine
ज़ीस्त =Life
दरमाँ = Medicine, Cure
कैफ़ = Intoxication, Happiness
बारह = Turn, Time
ख़ुलूस = Openness
शैख़ = Elder, Preacher

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2 Comments:

At 27/6/05 12:03 AM, Blogger Tadatmya Vaishnav said...

I think it must be 'Gam-e-hayaat'. 'daramaa.N' means medicine. Then the line makes sense: 'tears of love act as a balm on life's sorrow'

 
At 27/6/05 4:23 PM, Blogger Jaya said...

Thanks a lot Tadatmya. I have corrected it.

 

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